लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री ने परिसर का भ्रमण किया और 220 मीटर लंबे ग्लास डेक स्काईवॉक ब्रिज से गुजरकर वर्षावन का नजारा देखा। इस दौरान उन्होंने यहां लगाए गए विभिन्न पौधों और वृक्षों के बारे में नर्मदा निगम के अध्यक्ष मुकेश पुरी तथा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित अरोड़ा से जानकारी प्राप्त की। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उनके साथ मौजूद रहे।
प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का संगम
एकता नगर में विकसित यह परियोजना प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और टिकाऊ पर्यटन को एक साथ जोड़ती है। यहां पश्चिमी घाट, हिमालय और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के वर्षावनों में पाई जाने वाली विभिन्न सदाबहार वनस्पतियों को स्थान दिया गया है। इससे पर्यटकों को वन पारिस्थितिकी, जैव विविधता और वन संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
परिसर में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण विकसित किए गए हैं। इनमें 220 मीटर लंबा ग्लास डेक स्काईवॉक ब्रिज प्रमुख है। इसके अलावा पांच से आठ मीटर ऊंचाई वाला झरना, गोलाकार तालाब और उसे जोड़ने वाले पुल भी परिसर की सुंदरता बढ़ाएंगे।
प्राकृतिक संरचनाएं और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं
परियोजना में प्राकृतिक पत्थरों से तैयार 20 फीट ऊंचा और 40 फीट चौड़ा प्रवेश द्वार बनाया गया है। नर्मदा के पत्थरों और ईंट-चूने से तैयार पैदल मार्ग, वृक्षों की कतारें और वर्षावन की विभिन्न परतों को दर्शाता थीम आधारित परिदृश्य पर्यटकों को प्रकृति के करीब होने का अनुभव देंगे।
परिसर में विकसित सूचना केंद्र के माध्यम से नक्शों, चित्रों, जानकारीपूर्ण प्रदर्शनियों और क्यूआर कोड की मदद से वर्षावन पारिस्थितिकी, जैव विविधता तथा वन संरक्षण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
बच्चों के लिए विशेष खेल क्षेत्र भी तैयार किया गया है। यहां रॉक क्लाइंबिंग वॉल, विभिन्न ऊंचाई की स्लाइड, सीढ़ियों से जुड़ी ट्री बालकनी और झूलों जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
यह परियोजना एकता नगर को प्रकृति अध्ययन और पर्यावरण पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ ही वन संरक्षण तथा टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।















