वाटिका में पारंपरिक विधियों से तैयार 65 प्रजातियों के 1,147 लघु वृक्ष प्रदर्शित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने ई-कार्ट से उद्यान का भ्रमण कर समत्व वाटिका, जेन गार्डन और विभिन्न बोन्साई वृक्षों का अवलोकन किया।
बोन्साई कला और पारंपरिक तकनीकों की जानकारी ली
भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री ने उद्यान के व्याख्या केंद्र में भारत से वैश्विक बोन्साई कला तक की यात्रा, पारंपरिक तकनीकों और आभासी भ्रमण पर आधारित दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति देखी। इसके बाद उन्होंने बोन्साई प्रशिक्षण कार्यशाला का निरीक्षण किया।
यहां स्थानीय महिला कारीगरों द्वारा छोटे आकार के वृक्ष तैयार करने की प्रक्रिया को देखा और उनसे बातचीत कर उनके कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त की।
पर्यटकों के लिए विकसित की गईं विशेष सुविधाएं
प्रधानमंत्री ने वाटिका में पर्यटकों के लिए तैयार की गई विभिन्न सुविधाओं का भी जायजा लिया। इनमें झरने, फव्वारे, तालाब, दृश्यावलोकन स्थल, गज़ेबो, स्मृति चिह्न की दुकान और बच्चों के लिए विशेष खेल क्षेत्र शामिल हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति, कला और आध्यात्मिकता का अनुभव कराने का प्रयास किया गया है।
भारतीय प्राचीन कला से प्रेरित है वाटिका
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस पर 18.68 करोड़ रुपये की लागत से 13,885 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित इस वाटिका का लोकार्पण किया था।
यह उद्यान भारत की प्राचीन वामन वृक्ष कला और भगवान विष्णु के वामन अवतार से प्रेरित है। मान्यता के अनुसार, भारत में ईसा पूर्व 2000 से विकसित इस लघु वृक्ष कला का उल्लेख ‘विष्णु पुराण’ और ‘वृक्षायुर्वेद’ में मिलता है। समय के साथ यह कला चीन में ‘पुन त्साई’ और जापान में ‘बोन्साई’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।















