वाराणसी, 26 मई।
काशी में मंगलवार को गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर अहिल्याबाई घाट पर आयोजित एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान में मां गंगा का भव्य दुग्धाभिषेक किया गया। इस आयोजन में 51 वैदिक बटुकों ने मंत्रोच्चार के बीच गंगा पूजन और अभिषेक संपन्न कराया।
कार्यक्रम के दौरान वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में षोडशोपचार पूजन की विधि पूरी की गई। इस अवसर पर मां गंगा को विशेष रूप से केसर, फल और नैवेद्य अर्पित किए गए, जिसके पश्चात 51 लीटर दुग्ध से अभिषेक किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने गंगा दशहरा (गंगावतरण) के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की पावन स्मृति है। पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के फलस्वरूप ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, ताकि वे अपने पूर्वजों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकें।
आयोजन में सम्मिलित हुए गणमान्य व्यक्तियों ने भगीरथ के 'भगीरथ प्रयास' को समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोक कल्याण और समाज के उत्थान के लिए उसी संकल्प और समर्पण की आवश्यकता है। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ इस अनुष्ठान में भागीदारी की और गंगा मैया की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।














