रायसेन, 28 मई।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के विश्व धरोहर स्थल सांची से गुरुवार को भगवान गौतम बुद्ध के परम शिष्यों अरिहंत सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अस्थि कलश विशेष विमान से दिल्ली के लिए रवाना किए गए। इससे पूर्व सांची में इन कलशों को सशस्त्र बलों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
सांची स्थित चैतियगिरी विहार मंदिर के मुख्य तहखाने से सुबह 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में इन पवित्र कलशों को बाहर निकाला गया। इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं ने लगभग डेढ़ घंटे तक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की। सुरक्षा बलों के सम्मान समारोह के बाद कलशों को बुलेटप्रूफ और शॉक-प्रूफ विशेष बक्सों में सील कर भोपाल के लिए रवाना किया गया।
पूरी प्रक्रिया के दौरान अस्थि कलशों को कड़े सुरक्षा घेरे में सड़क मार्ग से भोपाल एयरपोर्ट तक लाया गया, जहां से इन्हें विशेष विमान के माध्यम से दिल्ली भेजा गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, वानगल उपतिस नायक थेरो, रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता तथा संस्कृति विभाग के निदेशक यश सक्सेना सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल में यह एक नई परंपरा के रूप में विकसित हुआ है, जिसके तहत पहले विदेशों में रखे गए अवशेषों को भारत लाया गया और अब उन्हें श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विभिन्न देशों में भेजा जा रहा है। वहीं वानगल उपतिस नायक थेरो ने इसे भारत और मंगोलिया के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया।
भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया भेजा जा रहा है, जहां इन्हें 29 मई को राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में दर्शन के लिए रखा जाएगा और 31 मई को उलानबातर में सार्वजनिक प्रदर्शनी होगी। इससे पूर्व यह अवशेष दो वर्ष पहले थाईलैंड भी भेजे जा चुके हैं।
अधिकारियों के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम द्वारा सांची में कलशों का वैज्ञानिक परीक्षण और भौतिक सत्यापन किया गया, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी तैयार की गई। इन्हें सदैव राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता है और पूरे मार्ग में 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित रहती है।
संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे सांची सहित मध्य प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।
यूनेस्को विश्व धरोहर सांची स्तूप बौद्ध आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन को बौद्ध संघ के महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है, जिनकी शिक्षाएं आज भी बौद्ध परंपरा में अत्यंत सम्मान के साथ स्मरण की जाती हैं।















