भोपाल, 2 जून ।
विश्व धरोहर सांची से भेजे गए भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया पहुंचने पर भव्य एवं श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्हें गंदन मॉनेस्ट्री में सार्वजनिक दर्शन के लिए स्थापित किया गया।
इन अवशेषों को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और मध्य प्रदेश शासन के निर्देशों के तहत 28 मई को भोपाल से रवाना किया गया था, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सहित विभिन्न वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही थी।
इसके बाद 31 मई को असम के राज्यपाल के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से इन अवशेषों को मंगोलिया ले जाया गया, जहां हवाई अड्डे पर मंगोलिया के शिक्षा मंत्री और प्रमुख बौद्ध मठों के वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।
यात्रा मार्ग से लेकर मंगोलिया पहुंचने तक श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही, जिन्होंने भक्ति और सम्मान के साथ पवित्र अवशेषों के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। इस अवसर पर भारत और श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं सहित उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित रहा।
गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक जारी रहेगा, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा और यह आयोजन आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बना रहेगा।
इस पहल को भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और बौद्ध विरासत के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इससे सांची जैसे ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों की वैश्विक पहचान और अधिक मजबूत होगी तथा बौद्ध पर्यटन सर्किट के प्रति अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बढ़ेगा, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना है।
ऐतिहासिक सांची स्तूप को विश्व के प्राचीनतम बौद्ध स्थलों में शामिल किया जाता है, जहां संरक्षित अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा जाता है, और उनके प्रमुख शिष्यों का बौद्ध दर्शन के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।




.jpg)







