प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईंधन बचाने, फिजूलखर्ची रोकने और स्वदेशी को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े मुखिया ने भी इस संदेश को आत्मसात करते हुए भारतीय कंपनी की इलेक्ट्रिक कार अपना ली। लेकिन सत्ता के दूसरे नंबर के दावेदार बताए जा रहे एक साहब शायद इस संदेश का दूसरा ही अर्थ निकाल बैठे।
चर्चा है कि उन्होंने विदेशी इलेक्ट्रिक कार खरीदकर लाखों रुपये विदेश भेज दिए। मकसद शायद यह बताना था कि आधुनिकता की दौड़ में वे भी किसी से पीछे नहीं हैं। अब सत्ता के गलियारों में कानाफूसी है कि जब स्वदेशी का दौर चल रहा हो, तब विदेशी चमक-दमक का प्रदर्शन आखिर किस संदेश का हिस्सा माना जाए। फिलहाल गाड़ी से ज्यादा चर्चा उसके विदेशी होने की हो रही है।






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