पेट्रोल-डीजल बचाने और दिखावे से दूर रहने के संदेश के बाद सत्ता के गलियारों में कुछ काफिलों पर गाज गिर गई। उज्जैन और ग्वालियर-चंबल के दो माननीयों पर कार्रवाई हुई तो लगा कि अब सबक सबको मिलेगा। लेकिन इसके बाद भी कई बड़े चेहरे दर्जनों गाड़ियों के काफिलों के साथ सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन पर किसी की नजर नहीं पड़ रही।
ऐसे में कार्रवाई झेल चुके दोनों माननीय आजकल मन ही मन पुराना गीत गुनगुनाते बताए जा रहे हैं—“हमसे का भूल हुई, जो ये सजा हमको मिली।” सत्ता के गलियारों में भी सवाल यही है कि नियम सबके लिए बराबर हैं या कुछ के लिए ज्यादा बराबर हैं।






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