नई दिल्ली, 24 मार्च।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक तैयारियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव स्रोत से कच्चा तेल और गैस जुटाने में लगी है, ताकि देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है और इसके लिए भारत लगातार क्षेत्रीय देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस संकट के कारण खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय प्रभावित हैं, जिनमें से अब तक 3.75 लाख से अधिक नागरिक सुरक्षित वापस आ चुके हैं। ईरान से भी 1,000 से अधिक भारतीयों की वापसी सुनिश्चित की गई है। हालांकि कुछ भारतीयों की मृत्यु और चोट की घटनाएं भी हुईं, जिनके परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है।
मोदी ने कहा कि भारत ने इस दशक में ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण तैयारी की है। पहले 27 देशों से ऊर्जा आयात होता था, अब यह संख्या 41 तक बढ़ गई है। इसके अलावा 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित किए गए हैं। सरकार एलपीजी, पाइप्ड नेचुरल गैस और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान शुरू करने और अंतर-मंत्रालयी समूह व सात नए एम्पावर्ड ग्रुप्स के गठन का भी उल्लेख किया। इनका लक्ष्य आयात-निर्यात, सप्लाई चेन और महंगाई की निगरानी करना है। उन्होंने किसानों और राज्यों को आश्वस्त किया कि उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और गरीबों, श्रमिकों एवं प्रवासी कामगारों के हितों की रक्षा की जाएगी।
मोदी ने अंत में भरोसा जताया कि मजबूत आर्थिक आधार, केंद्र और राज्यों के समन्वय तथा समय पर उठाए गए कदमों से भारत इस संकट का सफलतापूर्वक सामना करेगा और देश की ऊर्जा व आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित रहेगी।











