लखनऊ, 24 अप्रैल।
लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय सामने रखा गया। इस अवसर पर कृषि क्षेत्र के विस्तार और आधुनिकीकरण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में यह बात भी प्रमुखता से सामने आई कि कृषि के लिए सभी राज्यों को एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर उसी के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए, ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके। साथ ही नकली खाद और नकली कीटनाशकों के विरुद्ध सख्त अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने पर बल दिया गया।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए इसे देश में खाद्यान्न उत्पादन में शीर्ष स्थान पर बताया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि राज्य की उपजाऊ भूमि, अनुकूल जलवायु और किसानों की मेहनत इसकी बड़ी ताकत है। हिमालयी क्षेत्रों के फल, फूल और सब्जियों की विशेषता का भी उल्लेख किया गया।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश के सामने कृषि के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय में वृद्धि करना और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना शामिल है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत घटाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की दिशा में कार्य आवश्यक बताया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए इसके विविधीकरण की जरूरत है, जिसमें पशुपालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग पर चिंता जताते हुए कहा गया कि इससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, इसलिए प्राकृतिक और जैविक खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना आवश्यक है। फल, सब्जी और औषधीय खेती को भी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बताया गया।
बीज को कृषि की आधारभूत आवश्यकता बताते हुए कहा गया कि जलवायु के अनुकूल उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में बीज केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।
यह भी जानकारी दी गई कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और अब बाहर से अनाज मंगाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। चावल उत्पादन में देश की अग्रणी स्थिति का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित किया गया।
इसके साथ ही सभी राज्यों से विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाने, प्रयोगशालाओं को सीधे खेतों तक पहुंचाने और नवीन शोध को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की अपील की गई। जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए विशेष अभियान चलाकर यह सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में राज्य के कृषि एवं उद्यान मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।










