वाशिंगटन, 13 अप्रैल 2026
ईरान ने अमेरिका पर कठोर और अधिकतमवादी रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसी कारण इस्लामाबाद एमओयू के रूप में प्रस्तावित एक लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुका समझौता टूट गया और 21 घंटे चली उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि तेहरान ने 47 वर्षों में पहली बार अमेरिका के साथ इतने उच्च स्तर की सीधी बातचीत पूरी ईमानदारी और संघर्ष समाप्त करने की मंशा के साथ की थी, लेकिन अंत में कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में कई अवसरों के बावजूद अंततः “कुछ भी सीखा नहीं गया” जैसी स्थिति बनी।
उनके अनुसार दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब थे और “कुछ ही दूरी” पर अंतिम सहमति संभव थी, लेकिन अंतिम चरण में स्थिति अचानक बिगड़ गई और पूरा मसौदा अटक गया।
ईरानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिका ने लगातार अधिकतमवादी रवैया, बदलती शर्तें और अवरोध की नीति अपनाई, जिससे संभावित समझौता विफल हो गया। उन्होंने कहा कि सद्भावना के बदले सद्भावना मिलनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत तनाव और टकराव बढ़ा।
ईरान के राष्ट्रपति ने भी कहा कि यदि अमेरिका अपने रवैये में बदलाव करे और ईरानी अधिकारों का सम्मान करे, तो किसी भी समझौते का मार्ग अभी भी खुला है। उन्होंने अमेरिकी नीति को अत्यधिक कठोर बताते हुए इसमें परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसी बीच अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर सख्त समुद्री नाकेबंदी लागू करेगा, जिससे तनाव और बढ़ गया है। यह कदम उच्चस्तरीय वार्ता के असफल होने के तुरंत बाद उठाया गया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम सहित कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने स्पष्ट किया कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगी, हालांकि अन्य बंदरगाहों के पारगमन को बाधित नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में जहाजों को चेतावनी जारी करने और निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान के कुछ घंटे बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता में कुछ प्रगति के बावजूद प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।





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