वाशिंगटन, 13 अप्रैल 2026
अमेरिका ने ईरान के साथ वार्ता विफल होने के बाद समुद्री नाकेबंदी लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा अस्थिर संघर्ष विराम पर भी संकट गहरा गया है।
अमेरिकी सैन्य कमान ने घोषणा की है कि सोमवार से ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी समुद्री जहाजों पर रोक लगाई जाएगी। यह कदम उस वार्ता के असफल रहने के बाद उठाया गया है, जो युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से की गई थी और जिससे क्षेत्र में पिछले कई सप्ताह से जारी संघर्ष को रोकने की कोशिश की जा रही थी।
यह वार्ता इस्लामाबाद में हुई थी, जो एक दशक से अधिक समय बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत का पहला उच्चस्तरीय प्रयास माना गया। इससे पहले शुरू हुए अस्थायी संघर्ष विराम के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही थी, लेकिन समझौता नहीं हो सका।
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने स्पष्ट किया कि यह नाकेबंदी ईरान के सभी बंदरगाहों सहित अरब सागर और ओमान की खाड़ी तक लागू रहेगी तथा सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अन्य देशों के पारगमन वाले जहाजों को सीधे रोका नहीं जाएगा, लेकिन इसकी जानकारी अलग से जारी की जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी जहाज ईरान को अवैध शुल्क देगा, उसे अंतरराष्ट्रीय जल में रोका जाएगा और सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी जहाज या शांतिपूर्ण पोत पर हमला किया गया तो कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई। वहीं ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए सैन्य बलों ने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि को संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा।
ईरानी पक्ष ने आरोप लगाया कि परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अमेरिका लगातार कठोर शर्तें थोप रहा है, जबकि ईरान ने एक संतुलित समझौते की इच्छा जताई थी। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि जब समझौता करीब था, तब भी बाधाएं खड़ी की गईं।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संवर्धन कार्यक्रम और क्षेत्रीय संगठनों को समर्थन देने की नीतियों पर पीछे नहीं हटेगा, जबकि अमेरिका लगातार इन मुद्दों पर पूर्ण रोक की मांग कर रहा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बाद में यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान वार्ता में वापस नहीं आता तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।




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