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13 Apr, 2026

13 अप्रैल : जलियांवाला बाग हत्याकांड की दर्दनाक स्मृति और स्वतंत्रता संग्राम का मोड़

1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार की दर्दनाक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया और पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आक्रोश को और तीव्र कर दिया।

अमृतसर, 13 अप्रैल 2026।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में 13 अप्रैल का दिन एक अत्यंत पीड़ादायक और निर्णायक घटना के रूप में दर्ज है। वर्ष 1919 में इसी तारीख को जलियांवाला बाग में हुआ नरसंहार पूरे देश को झकझोर देने वाली घटना साबित हुआ। अमृतसर स्थित इस स्थल पर हजारों लोग एक शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे, जो स्वर्ण मंदिर के निकट स्थित है। उस समय ब्रिटिश शासन द्वारा रॉलेट एक्ट के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों पर कठोर रुख अपनाया जा रहा था।

इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। चारों ओर से संकरे मार्गों से घिरे इस बाग में मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। गोलीबारी शुरू होते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

इस भयावह घटना में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हो गए। कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ जान बचाने के लिए बाग में स्थित कुएं में कूद गईं। संकरी निकासी व्यवस्था के कारण मची भगदड़ ने भी अनेक लोगों की जान ले ली।

यह नरसंहार पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ गहरे आक्रोश का कारण बना। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने आजादी की लड़ाई को नई गति प्रदान की। आज भी 13 अप्रैल को यह त्रासदी श्रद्धांजलि के रूप में याद की जाती है और शहीदों को नमन किया जाता है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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