अमृतसर, 13 अप्रैल 2026
जालियांवाला बाग नरसंहार की 106वीं बरसी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे स्वतंत्रता संग्राम की एक निर्णायक और प्रेरणादायक घटना बताया।
राष्ट्रपति ने जालियांवाला बाग के बलिदानियों को अमर स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए कहा कि उनके त्याग ने देश में आजादी के प्रति नई चेतना और दृढ़ संकल्प को जन्म दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह बलिदान राष्ट्र को सदैव कृतज्ञ बनाए रखेगा और देशभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
उपराष्ट्रपति ने भी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि यह घटना स्वतंत्रता की कीमत की याद दिलाने वाली अत्यंत पीड़ादायक लेकिन प्रेरक गाथा है, जिसने पूरे देश की चेतना को झकझोर दिया। उन्होंने इसे भारतीय जनता के साहस और दृढ़ता का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह बलिदान देशवासियों के अदम्य साहस का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए समाज में सकारात्मक शक्तियों को मजबूत करने और विभाजनकारी तत्वों का विरोध करने का संदेश भी दिया, जिससे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एकजुटता बनी रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस नरसंहार ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया था और विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष को नई दिशा दी थी, जिससे स्वतंत्रता की भावना और अधिक मजबूत हुई।
केंद्रीय गृह मंत्री ने इसे ब्रिटिश शासन की अमानवीयता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और भगत सिंह व ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।
गौरतलब है कि 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जालियांवाला बाग में बैसाखी के अवसर पर एकत्र हुए लोगों पर रॉलेट एक्ट के विरोध के दौरान गोलीबारी की गई थी, जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जाता है।




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