हरिद्वार, 13 अप्रैल 2026
बैसाखी स्नान के पावन अवसर पर सोमवार को हरिद्वार की पवित्र भूमि पर आस्था का अद्भुत और भव्य दृश्य देखने को मिला, जहां गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण छा गया।
पवित्र स्नान के लिए देशभर से श्रद्धालु तड़के सुबह से ही हरिद्वार पहुंचने लगे और गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने की भावना के साथ घाटों पर निरंतर भीड़ बढ़ती रही। विशेषकर हर की पौड़ी सहित प्रमुख घाटों पर आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्रद्धालुओं ने केवल पवित्र स्नान ही नहीं किया बल्कि धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना भी की, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बना रहा।
घाटों पर उमड़ी भीड़ के बीच श्रद्धा और शांति का अनोखा मेल दिखाई दिया, जहां एक ओर भक्तिभाव की तीव्रता थी, वहीं दूसरी ओर सामूहिक सौहार्द और अनुशासन का दृश्य भी स्पष्ट रूप से नजर आया।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और घाटों तथा आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों सहित आधुनिक निगरानी व्यवस्था के माध्यम से पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी गई, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और स्थिति नियंत्रित बनी रहे।
प्रशासनिक सतर्कता और श्रद्धालुओं के सहयोग के कारण अब तक पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न हो रहा है।
बैसाखी को मुख्य रूप से फसल उत्सव के रूप में जाना जाता है, जिसे 14 अप्रैल को मनाया जाएगा और यह सिख समुदाय सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नए आरंभ और समृद्धि के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व रखता है।
साथ ही यह पर्व सौर नववर्ष के रूप में भी कई क्षेत्रों में मनाया जाता है, जिससे इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
इसी दिन जालियांवाला बाग नरसंहार की बरसी भी होती है, जिससे यह पर्व केवल उत्सव ही नहीं बल्कि स्मरण और श्रद्धांजलि का भी प्रतीक बन जाता है। आज यह दिन आस्था, एकता और संकल्प का संदेश देते हुए लोगों को भक्ति और विचारशीलता से जोड़ता है।




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