13 अप्रैल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर सैन्य घेराबंदी की धमकी दिए जाने के बाद चीन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की है, जबकि ब्रिटेन ने स्पष्ट रूप से इस तरह की सैन्य नाकेबंदी का विरोध जताया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित, स्थिर और बिना किसी बाधा के बनाए रखना पूरे विश्व समुदाय के साझा हित में है। साथ ही चीन ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के साथ सहयोग की इच्छा जताई।
इस पूरे घटनाक्रम पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि किसी भी प्रकार के दबाव के बावजूद ब्रिटेन को ईरान युद्ध में नहीं खींचा जा सकता तथा वह होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह जलमार्ग पूरी तरह खुला रहना आवश्यक है और इस दिशा में पहले से प्रयास जारी हैं।
इसी बीच ट्रंप की धमकी के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी युद्धपोतों को इस क्षेत्र से दूर रहने की अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। बताया जा रहा है कि भारत की तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है और हाल ही में ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है।
उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग माना जाता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह क्षेत्र वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और नाकेबंदी की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
यह जलमार्ग उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप तथा संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है। इसकी कुल लंबाई लगभग 167 किलोमीटर है, जबकि सबसे संकीर्ण हिस्से में इसकी चौड़ाई केवल 33 से 39 किलोमीटर तक रह जाती है।
दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देश अपने तेल निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।




.jpg)




.jpg)
_(1).jpg)

.jpg)