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15 Apr, 2026

ईरान-अमेरिका वार्ता फिर शुरू होने के संकेत, कूटनीतिक प्रयासों से वैश्विक बाजारों में राहत

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए संभावित वार्ता फिर शुरू होने के संकेत मिले हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आई है। साथ ही तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव देखने को मिला है।

वॉशिंगटन, 15 अप्रैल।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को समाप्त करने के लिए वार्ता अगले दो दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिया। सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल होने के बाद वॉशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध लागू कर दिया था।

पाकिस्तान, ईरान और खाड़ी क्षेत्र के अधिकारियों ने भी कहा कि अमेरिकी और ईरानी वार्ता दल इस सप्ताह के अंत में फिर से बातचीत के लिए लौट सकते हैं, हालांकि एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने स्पष्ट किया कि अभी किसी तारीख पर सहमति नहीं बनी है।

ट्रंप ने एक बयान में कहा कि स्थिति अगले दो दिनों में बदल सकती है और इस कारण बातचीत के लिए रुकना अधिक उपयुक्त होगा। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जॉर्जिया में कहा कि ट्रंप ईरान के साथ बड़ा समझौता चाहते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास मौजूद है और इसका समाधान तुरंत संभव नहीं है।

इस बीच अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया के बावजूद कूटनीतिक संकेतों से तेल बाजार में कुछ राहत देखी गई और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।

संघर्ष के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल और गैस परिवहन का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस संघर्ष में लगभग 5,000 लोगों की जान जा चुकी है।

इस्लामाबाद में पिछले सप्ताहांत हुई वार्ता किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी, जिससे दो सप्ताह के युद्धविराम के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों में मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका 20 वर्षों के लिए परमाणु गतिविधियों पर रोक चाहता है, जबकि ईरान तीन से पांच वर्ष की अस्थायी रोक का प्रस्ताव दे रहा है। अमेरिका ने यह भी मांग की है कि समृद्ध परमाणु सामग्री ईरान से बाहर की जाए।

वार्ता से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि बैकचैनल बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, जिससे दोनों पक्ष किसी नए प्रस्ताव के करीब पहुंच सकते हैं।

हालांकि 2015 के परमाणु समझौते जैसी जटिलता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी की आवश्यकता को देखते हुए किसी नए समझौते पर तुरंत सहमति बनना कठिन माना जा रहा है। ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग कर रहा है, जिसे अमेरिका अकेले सुनिश्चित नहीं कर सकता।

तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विकास अनुमान घटाया है और चेतावनी दी है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के करीब पहुंच सकती है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी आपूर्ति और मांग के अनुमान कम कर दिए हैं।

नाटो के सहयोगी देशों ने इस प्रतिबंध में शामिल होने से इनकार किया है, जबकि चीन ने इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने चीन पर युद्ध के दौरान तेल भंडारण का आरोप लगाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि बंदरगाह खुलने के बाद भी तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

इसी बीच इजराइल और लेबनान के बीच तनाव भी जारी है। अमेरिका ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक कराई, जो 1993 के बाद पहली उच्च स्तरीय बातचीत मानी जा रही है। लेबनान ने युद्धविराम की मांग की है जबकि इजराइल हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है। दोनों पक्षों ने आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।

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