नई दिल्ली, 16 अप्रैल।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 93.23 (अनंतिम) पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान घरेलू मुद्रा 93.29 पर खुली और दिन में 93.16 के उच्च स्तर तक पहुंची, जबकि यह 93.35 के निचले स्तर तक भी फिसली।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने की उम्मीदों के चलते रुपये को समर्थन मिला। हालांकि विदेशी पूंजी के लगातार बहिर्गमन और आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से इसकी बढ़त सीमित रही। कच्चा तेल करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव और संतुलन दोनों बना रहा।
बुधवार को भी रुपया 2 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 93.33 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में सुधार मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं से जुड़ा है, जिससे पिछले 48 घंटों में तेल कीमतों में गिरावट देखी गई और भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ।
हालांकि बाजार में यह सुधार अस्थिर माना जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी पल बदलाव से रुपये की दिशा प्रभावित हो सकती है। डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत बढ़कर 98.03 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर की मजबूती बनी रही।
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.65 प्रतिशत बढ़कर 96.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि इससे पहले यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था। विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल कीमतों को प्रभावित किया है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम में चीन ने ईरान से आग्रह किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध व्यापारिक आवागमन सुनिश्चित करे, जो वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
घरेलू शेयर बाजार में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई, जहां 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 122.56 अंक गिरकर 77,988.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 34.55 अंक फिसलकर 24,196.75 पर रहा।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को शुद्ध बिकवाली करते हुए 666.15 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वहीं आर्थिक आंकड़ों में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो तीन साल का उच्च स्तर है। खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़कर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई।
रुपया 10 पैसे की बढ़त के साथ 93.23 पर बंद हुआ, जबकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती के बीच बाजार में सीमित सुधार देखा गया।






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