नई दिल्ली 16 अप्रैल
नई दिल्ली 16 अप्रैल को भारत और ऑस्ट्रिया ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। यह घोषणा प्रधानमंत्री और ऑस्ट्रिया के चांसलर के बीच संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान की गई।
प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रियाई नेता का भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर स्वागत करते हुए कहा कि यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत का चयन दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चार दशकों बाद किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के संबंधों में नए युग की शुरुआत हुई है।
आर्थिक और बुनियादी ढांचा सहयोग पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया लंबे समय से नवाचार, अवसंरचना और स्थिरता के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। उन्होंने दिल्ली मेट्रो और हिमालय में बने अटल सुरंग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में ऑस्ट्रिया की तकनीकी भूमिका का उल्लेख किया।
इसके साथ ही रेलवे परियोजनाओं से लेकर गुजरात के गिरनार रोपवे, स्वच्छ ऊर्जा और शहरी विकास तक में ऑस्ट्रियाई कंपनियों की सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
आर्थिक सहयोग को नई गति देने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊर्जा देगी और एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ उनका भारत आना दोनों देशों के लिए सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने आगे कहा कि ऑस्ट्रिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की तेज़ विकास क्षमता को मिलाकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक विश्वसनीय बनाया जाएगा।
रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई गई।
शैक्षणिक सहयोग पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। आईआईटी दिल्ली और ऑस्ट्रिया की मोंटान यूनिवर्सिटी के बीच समझौता ज्ञापन को ज्ञान आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया।
युवा आदान-प्रदान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय प्रतिभा ऑस्ट्रिया की उत्पादकता और नवाचार क्षमता को बढ़ा सकती है।
2023 में हुए प्रवासन और गतिशीलता समझौते का विस्तार करते हुए नर्सिंग क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। साथ ही स्टार्टअप और संयुक्त शोध को बढ़ावा देने तथा ‘वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम’ शुरू करने की घोषणा की गई।
वैश्विक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय गंभीर तनाव और संघर्ष की स्थिति से गुजर रही है, जिसका प्रभाव सभी पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सैन्य संघर्ष किसी समस्या का समाधान नहीं है और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में स्थिर और स्थायी शांति का समर्थन किया जाना चाहिए।
साथ ही वैश्विक संस्थानों में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता को भी आवश्यक बताया गया। अंत में उन्होंने कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी को नवाचार आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाना समय की मांग है।






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