एक हाई-प्रोफाइल मामले में करोड़ों का खेल हुआ। जिस अधिकारी के दौर में सब हुआ, वही पुरस्कार पाकर ऊपर बैठ गए। जब घोटाला खुला, तो जांच भी उन्हीं के जिम्मे—यानी खिलाड़ी ही अंपायर। नतीजा आया, कार्रवाई हुई, पर गाज गिरी सबसे नीचे—चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर। बेचारा पूछ रहा है—“साहब, करोड़ों का भुगतान मेरे अधिकार में कब से आ गया?” जवाब देने वाला कोई नहीं, क्योंकि ऊपर बैठे लोग फाइल से बाहर नहीं आते।












