बेंगलुरु, 25 मार्च 2026।
कर्नाटक विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों से चुनौतियां बढ़ रही हैं।
सिद्धारमैया ने बताया कि 2025-26 के संशोधित अनुमान के अनुसार कर्नाटक का राजकोषीय घाटा 2.95 प्रतिशत है, जो महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा लगभग सभी राज्यों में देखा जा रहा है, लेकिन कर्नाटक और महाराष्ट्र में यह अपेक्षाकृत कम है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि बजट में संशोधन को राजस्व संग्रह में कमी से जोड़ना सही नहीं है। पड़ोसी राज्यों में भी वास्तविक राजस्व अनुमान से कम रहा है। उन्होंने जीएसटी दरों में संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे राज्य की आय पर प्रतिकूल असर पड़ा और मासिक संग्रह में गिरावट आई, जिससे 2025-26 और 2026-27 में क्रमशः 10,000 करोड़ और 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। चालू वित्त वर्ष में राजस्व घाटा 22,957 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि जीएसटी दरों में बदलाव से आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को फायदा हुआ। उन्होंने राज्य के कुल राजस्व में वृद्धि का अनुमान 3.15 लाख करोड़ रुपये तक जताया।
केंद्र सरकार द्वारा करों में हिस्सेदारी घटाए जाने पर भी मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। 14वें वित्त आयोग में 4.713 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो 15वें में घटकर 3.647 प्रतिशत हुई और 16वें आयोग ने 4.131 प्रतिशत की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि जीएसटी मुआवजा बंद होने और केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। 2019 से 2022 के बीच 57,351 करोड़ रुपये मुआवजा मिला था, लेकिन 2023 से बंद कर दिया गया। 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से कुल नुकसान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा, “इन सभी चुनौतियों के बावजूद हम राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं।”












