रुद्रप्रयाग, 19 अप्रैल।
केदारनाथ धाम की वार्षिक तीर्थयात्रा की औपचारिक शुरुआत रविवार को उस समय हो गई जब भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से विधिवत पूजन के बाद धाम की ओर प्रस्थान कर गई। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच जैसे ही डोली रवाना हुई, पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर को करीब आठ कुंतल पुष्पों से आकर्षक रूप में सजाया गया था। इससे पूर्व परंपरा के अनुसार शनिवार रात भैरवनाथ जी की पूजा संपन्न की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और अनेक भक्त पैदल यात्रा में भी शामिल हुए।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली ऊखीमठ से चलकर गुप्तकाशी पहुंचेगी, जहां श्री विश्वनाथ मंदिर में दर्शन हेतु अल्प विराम लिया जाएगा। इसके बाद फाटा के लिए प्रस्थान होगा, जहां रात्रि विश्राम निर्धारित है। आगे 20 अप्रैल को डोली फाटा से आगे बढ़कर गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर पहुंचेगी और वहां रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचकर मंदिर भंडार में विराजमान होगी। फिर 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे, जिसके साथ यात्रा का औपचारिक आरंभ होगा।
जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग और बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने हेतु सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं तथा स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, मार्ग सुधार और बर्फ हटाने जैसी तैयारियां पूरी की गई हैं।
केदारनाथ क्षेत्र की विधायक ने बताया कि सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि यात्रा व्यवस्थित और सुरक्षित रहे। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है और इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।









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