30 मार्च 2026, नई दिल्लीलोकसभा ने सोमवार को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक 2025 को पारित कर दिया। इस विधेयक में चयन समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए कुल 12 बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दिवाला समाधान व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इन संशोधनों का मकसद व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करना और वर्ष 2016 में लागू कानून को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। उन्होंने बताया कि यह बदलाव अब तक के अनुभव और न्यायालयों तथा न्यायाधिकरणों के निर्णयों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य सभी हितधारकों के लिए अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करना और समाधान प्रक्रिया में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है। उनके अनुसार, यह कानून संकटग्रस्त कंपनियों को जारी रखते हुए उनके मूल्य को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
बैंकिंग क्षेत्र पर इसके प्रभाव का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से वित्तीय स्थिति में सुधार आया है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि विभिन्न माध्यमों से बैंकों ने 1,04,099 करोड़ रुपये की वसूली की है, जिसमें से 54,528 करोड़ रुपये, यानी 52.3 प्रतिशत, इसी प्रक्रिया के जरिए प्राप्त हुए हैं।
विधेयक में छोटे उद्यमों के लिए मौजूदा त्वरित प्रक्रिया को हटाकर लेनदारों द्वारा शुरू की जाने वाली नई प्रणाली प्रस्तावित की गई है, जिसमें समयसीमा कम होगी। इसके अलावा अदालत के बाहर समझौते की व्यवस्था और ऐसी प्रणाली भी शामिल की गई है, जिसमें प्रबंधन मौजूदा निदेशक मंडल के पास ही रहेगा, लेकिन निर्धारित शर्तों और समयसीमा के तहत।
संशोधनों में समूह स्तर पर दिवाला प्रक्रिया और सीमा पार मामलों के समाधान से जुड़े प्रावधान भी जोड़े गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और जटिल मामलों को सरल बनाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि चयन समिति ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसकी सभी 11 सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। साथ ही एक अतिरिक्त प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत लेनदारों की समिति को अपने निर्णयों के कारण दर्ज करने होंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।












