जबलपुर, 31 अक्टूबर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। देश की समृद्ध न्यायिक परंपरा, बार और बेंच के बीच बेहतर तालमेल तथा संविधान के प्रति निष्ठा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया है। विश्व के कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के बीच भारत का सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में मजबूती से खड़ा रहना हमारी न्याय व्यवस्था की विशेष उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार शाम जबलपुर में महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का सम्मान किया गया।

डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय न्याय परंपरा का प्रभाव केवल संविधान और न्यायालयों तक सीमित नहीं है। हमारी संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जीवन में भी न्याय, नैतिकता तथा कर्तव्य के आदर्श दिखाई देते हैं। मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ से लेकर ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों तक न्याय और नैतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति मिलती है।
उन्होंने कहा कि देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की भूमिका और उसके निर्णय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। संवैधानिक संस्थाओं और न्याय व्यवस्था ने लोकतंत्र की मूल भावना को सुरक्षित रखने में योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने कानूनों को हटाकर वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नए कानून लागू किए गए हैं। मध्य प्रदेश में भी सरकार ने 900 से अधिक अनुपयोगी कानून समाप्त किए हैं। इनमें ऐसे कई कानून शामिल थे, जिनकी बदलते समय में प्रासंगिकता नहीं रह गई थी। इन बदलावों से शासन व्यवस्था को अधिक उपयोगी और समयानुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।
न्यायपालिका और सरकार निभाएं अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियांमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की विशेषता यह है कि न्यायालय स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभाएं और जनता द्वारा चुनी गई सरकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। दोनों संस्थाओं की अलग-अलग संवैधानिक सीमाएं और भूमिकाएं हैं। कई बार यह तय करना भी कठिन हो जाता है कि किसी विषय पर ज्ञापन देना उचित है या न्यायालय में जाना चाहिए।
नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सर्वाधिक आबादी वाला देश है। इसके बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजबूती से कायम रहना गौरव का विषय है। इसमें न्यायपालिका, बार और देश की न्यायिक परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान है।
मुख्यमंत्री ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का न्यायधानी जबलपुर में स्वागत किया और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में प्रदेश की न्यायिक परंपरा और अधिक उत्कृष्ट बनेगी।
बार-बेंच के विश्वास से मजबूत होगी न्याय व्यवस्थामुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा कि बार और बेंच न्याय प्रशासन के दो प्रमुख आधार हैं। दोनों की जिम्मेदारियां अलग होने के बावजूद उनका साझा उद्देश्य संविधान की रक्षा, नागरिक अधिकारों का संरक्षण और बिना भय या पक्षपात के निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि बार और बेंच के संबंध आपसी सम्मान, संस्थागत स्वतंत्रता, पेशेवर ईमानदारी और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित होने चाहिए। न्यायिक कार्यवाही में विचारों का अंतर स्वाभाविक है, लेकिन इसे पेशेवर शिष्टाचार और न्याय के प्रति समर्पण के साथ सुलझाना चाहिए।
न्यायमूर्ति कोगजे ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
महाधिवक्ता कार्यालय अधिवक्ताओं के लिए विश्वविद्यालय समानमुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता कार्यालय को न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार का पक्ष प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है। बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी इसकी अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं। महाधिवक्ता कार्यालय अधिवक्ताओं के लिए विश्वविद्यालय की तरह है, जहां उन्हें व्यापक अनुभव और सीखने के अवसर मिलते हैं। इससे उनकी पेशेवर क्षमताएं विकसित होती हैं और वे समाज में बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार होते हैं।
न्यायमूर्ति कोगजे ने अपने गृह राज्य में महाधिवक्ता कार्यालय से मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं भी इस व्यवस्था से लाभान्वित हुए हैं।
अधिवक्ताओं से गरिमा के साथ जिम्मेदारी निभाने की अपीलमुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं से अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज में गरिमापूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि सभी अपने लक्ष्य प्राप्त कर कार्यों से सम्मान अर्जित करें।
उन्होंने अधिवक्ताओं से अपने संस्थागत दायित्वों का सम्मान करते हुए न्याय वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की।
वकालत में पीढ़ियों से जुड़ते हैं परिवार : न्यायमूर्ति रुसियाकार्यक्रम में न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने जबलपुर में वकालत के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने यहां वकालत की और बाद में न्यायाधीश बने। उनके अनुसार, वकालत ऐसा पेशा है, जिसमें परिवारों की कई पीढ़ियां जुड़ी रहती हैं। पहली पीढ़ी के बाद दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी इस पेशे को आगे बढ़ाती है।
न्यायपालिका और विधायिका के समन्वय से मिलेगा निष्पक्ष न्यायमध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि न्यायपालिका और विधायिका के बीच बेहतर समन्वय से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सहज, त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। इससे राज्य विकास और प्रगति के नए आयाम भी स्थापित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि दोनों संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समारोह में एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर सिंह, सीनियर एडवोकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहन शर्मा और जिला बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष मनीष मिश्रा का भी अभिनंदन किया गया।

















