शिमला, 20 मार्च 2026।
शिमला में एलएसडी ड्रग तस्करी मामले ने पुलिस विभाग के भीतर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत वाली एलएसडी की खेप से जुड़े मामले में गिरफ्तार चार पुलिसकर्मियों को अदालत ने चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब इनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश कर रही हैं।
शिमला पुलिस के अनुसार गिरफ्तार चारों आरोपी पुलिसकर्मी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में तैनात थे। इनमें राजेश कुमार (40 वर्ष), समीर (40 वर्ष), नितेश (46 वर्ष) और अशोक कुमार (42 वर्ष) शामिल हैं। इन्हें 19 मार्च को गिरफ्तार किया गया और अदालत ने इन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा।
इस पूरे मामले की शुरुआत 10 मार्च को हुई, जब पुलिस थाना न्यू शिमला की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर संदीप शर्मा (जिला मोगा, पंजाब) और प्रिया शर्मा (जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 562 स्ट्रिप्स एलएसडी बरामद हुई, जिसका कुल वजन 11.570 ग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य करीब एक करोड़ रुपये आंका गया।
जांच में एलएसडी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ। मुख्य सप्लायर नेविल हैरिसन (केरल, कालीकट निवासी) को 13 मार्च को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया गया। संदीप शर्मा और नेविल हैरिसन द्वारा कुल्लू जिले में खेप तस्करी की गई थी। इसी दौरान एसटीएफ के चार पुलिसकर्मियों ने इस ट्रैफिकिंग को इंटरसेप्ट किया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने खुद तस्करों के साथ मिलकर खेप आगे बढ़ाने में मदद की।
पुलिस का कहना है कि यह मामला लापरवाही का नहीं बल्कि आपराधिक साजिश, अनुशासनहीनता और नैतिक कदाचार का है। डिजिटल, भौतिक और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई। 16 मार्च को एडीजी सीआईडी ने इन्हें निलंबित कर विस्तृत जांच शुरू की।
अब पुलिस रिमांड के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि नेटवर्क में और कौन शामिल है, क्या यह कोई बड़ा अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह है और पुलिसकर्मियों की इसमें क्या भूमिका रही। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।












