विभागीय निरीक्षण और मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान सामने आया कि कई पंचायतों में कर्मचारी निर्धारित पंचायत भवन के बजाय निजी घरों या अन्य स्थानों से काम कर रहे हैं। पंचायतों के लिए खरीदे गए कंप्यूटर, फर्नीचर, टेलीविजन और अन्य सरकारी सामान भी निजी अथवा अनुपयुक्त स्थानों पर रखे मिले। इसके अलावा, कार्यालयीन समय में कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने की शिकायतें भी प्राप्त हुई थीं।
पंचायत भवन में नियमित कार्यालय संचालन अनिवार्य
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिन पंचायतों में भवन उपलब्ध हैं, वहां निर्धारित समय पर नियमित रूप से कार्यालय संचालित किए जाएं। यदि पंचायत भवन अधूरा, जर्जर या कामकाज के लिए अनुपयुक्त है, तो सामुदायिक अथवा बहुउद्देशीय भवन में कार्यालय चलाया जाए। निजी निवास से कार्यालय संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
सरकारी सामग्री का होगा भौतिक सत्यापन
पंचायतों में उपलब्ध फर्नीचर, सूचना प्रौद्योगिकी उपकरण, टेलीविजन और अन्य सरकारी सामग्री का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए सभी वस्तुओं का विवरण भंडार पंजिका में दर्ज करना होगा, ताकि सरकारी सामान की उपलब्धता और स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके।
खंड पंचायत अधिकारियों और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।













