कटनी, 12 अप्रैल 2026।
कटनी रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात उस समय बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया गया जब रेल सुरक्षा बल और जीआरपी की संयुक्त टीम ने पटना–पूर्णा एक्सप्रेस से 167 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित उतारकर संरक्षण में ले लिया, जिसके बाद पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई।
जानकारी के अनुसार ये सभी बच्चे बिहार के अररिया से महाराष्ट्र के लातूर ले जाए जा रहे थे, लेकिन यात्रा के दौरान उनके पास आवश्यक दस्तावेज, टिकट और अन्य व्यवस्थाओं की स्पष्टता नहीं मिलने पर मामला संदिग्ध मानते हुए कार्रवाई की गई।
सूत्रों के मुताबिक बाल कल्याण समिति को पहले ही इस संबंध में सूचना प्राप्त हो गई थी कि बड़ी संख्या में बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाया जा रहा है, जिसके बाद रेल सुरक्षा बल और जीआरपी ने सतर्कता बढ़ाकर प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर घेराबंदी की और ट्रेन पहुंचते ही कोचों की तलाशी शुरू कर दी।
रेस्क्यू के दौरान बच्चों के साथ मौजूद सद्दाम नामक व्यक्ति ने दावा किया कि वह उन्हें लातूर के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए लेकर जा रहा था और यह कार्य वह लंबे समय से करता आ रहा है, लेकिन अभिभावकों की अनुमति, आवश्यक दस्तावेज और बच्चों की रहने–खाने की व्यवस्था को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से संदेह और गहरा गया।
चाइल्ड प्रोटेक्शन अधिकारी मनीष तिवारी के अनुसार सभी बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है, साथ ही उनकी उम्र, पहचान और यात्रा के उद्देश्य की विस्तृत जांच भी जारी है।
प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिगत बच्चों को अलग-अलग स्थानों पर रखा है, जिनमें कुछ को कटनी में ही सुरक्षित रखा गया है जबकि अन्य को जबलपुर भेजा गया है, जहां बाल संरक्षण इकाइयां उनकी देखरेख कर रही हैं।
रेल सुरक्षा बल के अनुसार बच्चों के साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह मामला शैक्षणिक गतिविधि से जुड़ा है या इसमें मानव तस्करी जैसी गंभीर साजिश शामिल है, और सभी एजेंसियां मिलकर पूरे प्रकरण की गहन जांच में जुटी हैं।











