02 अप्रैल 2026।
नासिक दुष्कर्म मामले में आरोपित अशोक खरात को गुरुवार को नासिक जिला न्यायालय ने दूसरे मामले में ८ अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया। सुरक्षा कारणों के चलते उसे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया।
इससे पहले बुधवार को नासिक जिला न्यायालय ने खरात को पहले दुष्कर्म मामले में १४ दिनों के लिए न्यायिक कस्टडी में भेजा था और उसे नासिक सेंट्रल जेल में रखा गया था। लोगों के बढ़ते गुस्से और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी ने आरोपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में लाने के बजाय वीसी के माध्यम से पेश करने की अनुमति मांगी थी।
अदालत में चार बड़ी स्क्रीन लगाई गई थीं, जिससे आरोपित खरात, जज और अदालत की कार्रवाई देख सकते थे। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील शैलेंद्र बागड़े ने बताया कि दूसरी शिकायत में खरात ने पीड़िता को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म किया और उसे गर्भवती बनाने के बाद अबॉर्शन के लिए गोलियां और हर्बल दवा दी। जांच अभी जारी है कि उसे यह दवा और गोलियां कहां से मिलीं और इनकी सामग्री क्या थी।
सरकारी वकील ने यह भी बताया कि खरात पीड़िता को "तुम एक अप्सरा हो" कहकर बहलाता और शोषण करता था। वह पीड़िता के रिश्तेदारों से आधार और पैन कार्ड भी मांग रहा था, जिस पर जांच चल रही है कि क्या इसका मकसद उनकी संपत्ति हड़पना था। इस मामले में आरोपी को सात दिन तक पुलिस कस्टडी में रखने की मांग की गई।
न्यायाधीश बी. एन. ईचपुरानी ने आरोपी से पूछा कि क्या उसे कुछ कहना है, जिस पर खरात ने 'नहीं' में जवाब दिया। आरोपित के वकील सचिन भाटे ने बताया कि आरोपी पिछले १५ दिनों से इसी प्रकार के मामले में पूछताछ के लिए कस्टडी में है, इसलिए अतिरिक्त पुलिस कस्टडी की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे ८ अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश दिया।











