नई दिल्ली, 02 अप्रैल।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने ईरान से अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करते हुए 1200 से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि निकाले गए कुल लोगों में 845 छात्र शामिल हैं।
नई दिल्ली में आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि कुल निकाले गए भारतीयों में से 996 लोगों को आर्मेनिया पहुंचाया गया है, जबकि 204 नागरिकों को अजरबैजान ले जाया गया है। इन स्थानों से उनकी भारत वापसी के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षित आवागमन और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को सुचारू बनाया जा रहा है। सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हैं।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं। 28 मार्च को उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से चर्चा की, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर विचार साझा किए।
प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए समुद्री मार्गों को सुरक्षित और खुला बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया।
विदेश मंत्रालय की ओर से एक अन्य जानकारी में बताया गया कि 28 फरवरी से अब तक पश्चिम एशिया क्षेत्र से लगभग 6.24 लाख यात्री भारत लौट चुके हैं। यह प्रक्रिया क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच जारी है।
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच सीमित संख्या में विशेष उड़ानों का संचालन किया जा रहा है, जो सुरक्षा और संचालन की स्थितियों के आधार पर तय होता है। गुरुवार को यूएई से भारत के विभिन्न शहरों के लिए करीब 90 उड़ानों के संचालन की संभावना जताई गई है।
मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की स्थिति की भी जानकारी साझा की और दोहराया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।











