गुवाहाटी, 03 अप्रैल।
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी असम विधानसभा चुनाव में एआईयूडीएफ के समर्थन में प्रचार करने के लिए राज्य में पहुंच गए हैं। वे दूसरे दिन बराक घाटी में चुनावी सभाओं में हिस्सा लेंगे और मतदाताओं से एआईयूडीएफ के पक्ष में एकजुट होने की अपील करेंगे।
ओवैसी गुरुवार को असम पहुंचे थे और निचले असम के बरपेटा, धुबड़ी सहित अन्य जिलों में रात तक चुनावी अभियान चलाया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम मतदाता आगामी 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में एआईयूडीएफ के पक्ष में मतदान करेंगे।
जनसभाओं में उन्होंने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। ओवैसी ने इस क्षेत्रीय पार्टी को असम की राजनीति में निर्णायक शक्ति बताते हुए कहा कि मुसलमानों की एकजुटता से 29 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित होगी और राज्य की राजनीतिक दिशा एआईयूडीएफ तय करेगी।
सत्ताधारी भाजपा पर नफ़रत की राजनीति का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कांग्रेस की भी आलोचना की। उनका कहना था कि ऐसे राजनीतिक माहौल ने अल्पसंख्यक समुदायों के बीच एआईयूडीएफ के समर्थन को और मजबूत किया है।
राज्य सरकार के बेदखली अभियानों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इसे असंवैधानिक बताया। ओवैसी ने कहा कि अजमल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसमें आदेश दिया गया था कि यदि यह वन भूमि है तो लोगों को दूसरी जमीन दी जाए, अन्यथा उन्हें न हटाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 50 हजार लोगों को बेदखल किया गया है, जो नफ़रत और मानवाधिकार उल्लंघन का बड़ा मामला है।
ओवैसी ने कहा कि असम में अल्पसंख्यक समुदाय लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रहा है और उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 'मिया मुसलमानों' के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असम आए हैं।
उन्होंने एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर भाजपा और पिछली कांग्रेस सरकारों दोनों की आलोचना की और कहा कि दशकों से असम में अल्पसंख्यक समुदाय का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता रहा है। उनका कहना है कि इस समुदाय की नागरिकता के मसले का राजनीतिक फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।












