कोलकाता, 16 मई।
पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री स्कूल योजना के लागू होने का मार्ग अब पूरी तरह साफ हो गया है। लंबे समय से अटकी इस योजना को लेकर हुए विवाद और देरी के बाद अब राज्य में इसे शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
दिल्ली में 15 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इस योजना को लागू करने पर सहमति बनी है। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इस परियोजना पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
इस योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक से कम से कम एक स्कूल को चयनित कर मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर आधारभूत संरचना तक व्यापक सुधार किए जाएंगे, ताकि ये अन्य विद्यालयों के लिए आदर्श बन सकें और छात्रों के समग्र विकास में सहायक हों।
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है, जिसमें 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। वर्ष 2027 तक देशभर में हजारों स्कूलों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इससे पहले राज्य में इस योजना को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं, जिसमें नामकरण को लेकर असहमति जताई गई थी। तर्क दिया गया था कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और राज्य की भागीदारी के बावजूद स्कूलों के नाम के साथ ‘पीएमश्री’ जोड़ना उचित नहीं है, जिसके चलते योजना का क्रियान्वयन रुका हुआ था।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब इस योजना को लागू करने की दिशा में तेजी आई है और चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक चरण में प्रत्येक जिले और ब्लॉक से स्कूलों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से मॉडल स्कूल में बदला जाएगा।
शिक्षा विभाग के अनुसार कुछ केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में पहले ही इस मॉडल को लागू किया जा चुका है, और अब राज्य के सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और संगठनों ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे राज्य के छात्रों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा उपलब्ध होगी।









