लखनऊ, 31 मार्च।
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आज लोक भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में रबी सीजन 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन फसलों की खरीद की व्यापक रणनीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि किसानों को उनके उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एमएसपी पर खरीद की प्रभावी व्यवस्था बनाई है।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि भारत सरकार से मिली अनुमति के बाद प्रदेश में चना, मसूर, सरसों और तूर (अरहर) की खरीद 2 अप्रैल से शुरू होकर 30 जून 2026 तक की जाएगी। इस दौरान चना का एमएसपी 5875 रूपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों का 6200 रूपये प्रति क्विंटल और तूर का 8000 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। उन्होंने बताया कि चना के लिए 2.24 लाख मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6.77 लाख मीट्रिक टन, सरसों के लिए 5.30 लाख मीट्रिक टन और तूर के लिए 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें स्थापित की गई हैं, ताकि किसानों की पहचान सुनिश्चित हो और डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा सके। इस साल कुल 190 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि राज्य स्तरीय एजेंसियां भी अतिरिक्त केंद्र चलाएंगी।

कृषि मंत्री ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र में हो रही प्रगति के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर खर्च की गई है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधारों के चलते राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि बीज वितरण योजनाओं के तहत 11.25 लाख किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज दिए गए, और 12.73 लाख किसानों को 54,847 क्विंटल बीज निःशुल्क वितरित किया गया। इसके अलावा, 31,950 क्विंटल जायद फसलों का बीज भी वितरित किया गया।
मंत्री ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता भी राज्य में पर्याप्त है, और वर्तमान में 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसका वितरण पीओएस मशीनों के माध्यम से किया जा रहा है।
अंत में, उन्होंने बताया कि राज्य में “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क” की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए 50.84 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई है। यह कदम प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।










