जयपुर, 23 अप्रैल।
राजस्थान के खाद्य सुरक्षा और औषधि नियंत्रण विभाग ने गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण सात दवाओं को ‘मानक के अनुरूप नहीं’ घोषित किया है। यह निर्णय 1 से 15 अप्रैल 2026 तक की गई प्रयोगशाला जांचों के परिणामों के आधार पर लिया गया।
औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने सभी जिलों के अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि इन दवाओं के संबंधित बैच को तुरंत बाजार से हटा लिया जाए। विभाग की आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि नियमित जांच और नमूना परीक्षण के दौरान कई दवाओं में गुणवत्ता मानकों की कमी पाई गई, जिससे इनकी प्रभावशीलता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह कार्रवाई उन दवाओं पर की गई है, जिनमें एंटीबायोटिक, खांसी की दवाएं और अन्य महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। कुछ दवाओं में सक्रिय तत्व की मात्रा कम पाई गई, तो कुछ दवाएं द्रवण परीक्षण में फेल हो गईं, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि ये दवाएं शरीर में सही तरीके से काम नहीं कर पाएंगी।
अब, सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, चिकित्सा कॉलेजों, फार्मेसियों और वितरकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दवाओं की बिक्री, वितरण और उपयोग तुरंत बंद करें। इसके साथ ही, संबंधित कंपनियों के अन्य बैचों की भी सख्त जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की कोई लापरवाही न हो।
यह कार्रवाई औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत की जा रही है, और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



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