बिलासपुर, 25 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में जगह बना ली है, जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह मामला पुनः हाईकोर्ट पहुंचा और इसकी मेरिट पर विस्तृत सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई।
करीब दो दशक पुराने इस प्रकरण में बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसमें पक्षकार उपस्थित रहे। कोर्ट ने मामले की अंतिम और विस्तृत सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले हाईकोर्ट ने दो साल पहले दोषियों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।
हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा के लिए इसे हाईकोर्ट भेजा। रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी, जब उन्हें गोली मार दी गई। प्रारंभिक जांच पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंपा।
सीबीआई की जांच में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नाम भी शामिल थे। इनमें से कुछ सरकारी गवाह बने, जबकि अधिकांश को अदालत ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई। एक प्रमुख आरोपी को साक्ष्यों की कमी के कारण निचली अदालत ने बरी किया था, जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इस अपील के आधार पर मामला पुनः हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला केवल प्रत्यक्ष साक्ष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक बड़े षड्यंत्र की गहन जांच की आवश्यकता है। रामावतार जग्गी का व्यवसायिक पृष्ठभूमि मजबूत था और वे प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका रखते थे। उनकी हत्या उस समय हुई थी, जब राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव और चुनावी हलचल देखी जा रही थी।
अब पूरे प्रदेश की नजरें इस केस की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह तय होगा कि वर्षों पुराने इस चर्चित हत्याकांड में कानूनी प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ती है।












