नई दिल्ली, 19 मई ।
सुप्रीम कोर्ट में नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे आम लोगों को असुविधा हो।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सड़क पर प्रदर्शन के नाम पर आवागमन बाधित करना, कानून व्यवस्था को प्रभावित करना या भय का माहौल पैदा करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
यह टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम लोकनेता डी बी पाटिल के नाम पर रखने की मांग की गई थी और केंद्र सरकार को इस पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल थे। अदालत ने यह भी कहा कि यह विषय नीति निर्धारण से जुड़ा है और न्यायालय किसी भी हवाई अड्डे के नाम को तय नहीं कर सकता।
अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांग उठाने का अधिकार है और यदि सरकार तत्काल निर्णय नहीं लेती है, तब भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना उचित है।
अंत में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका पर कोई निर्देश जारी नहीं किया।











