वॉशिंगटन, 15 अप्रैल।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सुधारों पर भारत ने स्पष्ट रूप से दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता प्रणाली के प्रस्ताव का विरोध किया है। हालांकि भारत ने जी4 समूह के उस सुझाव का समर्थन जताया है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों को 15 वर्षों तक वीटो अधिकार न देने की बात कही गई है।
सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं (आईजीएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरिश ने कहा कि वीटो अधिकार सहित स्थायी श्रेणी का विस्तार ही वास्तविक सुधार की दिशा में आवश्यक कदम है।
उन्होंने कहा कि केवल नई श्रेणी बनाकर बिना वीटो अधिकार के सदस्य जोड़ना असमानता को संस्थागत रूप देगा और वार्ताओं को और जटिल बना देगा। भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था परिषद में पहले से मौजूद असंतुलन को और मजबूत करेगी।
भारत ने जी4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें कहा गया है कि नए स्थायी सदस्य 15 वर्षों की समीक्षा अवधि तक वीटो अधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे। ब्राजील ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करते हुए इसे गतिरोध तोड़ने की कोशिश बताया।
भारत ने यह भी कहा कि यूएनएससी की मौजूदा संरचना 80 साल पुरानी है और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित नहीं करती। 1965 के बाद केवल एक बार सुधार हुआ, जिससे स्थायी सदस्यों की शक्ति असंतुलित रूप से बढ़ गई।
भारत ने अफ्रीकी देशों के उस रुख का समर्थन दोहराया, जिसमें नए स्थायी सदस्यों को भी वीटो अधिकार दिए जाने की मांग की गई है, जब तक यह व्यवस्था बनी रहती है।
भारत ने कहा कि वीटो से जुड़े सीमित सुधार प्रयास प्रभावी साबित नहीं हुए हैं और बार-बार इसका उपयोग जारी रहा है। साथ ही “अप्रत्यक्ष वीटो” की प्रवृत्ति भी निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
भारत ने व्यापक और चरणबद्ध सुधार प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्पष्ट समयसीमा और ठोस वार्ता ढांचा जरूरी है।
भारत ने सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर एक अधिक प्रतिनिधिक, संतुलित और प्रभावी सुरक्षा परिषद के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।





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