नई दिल्ली, 20 मई ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदर्श जीवन मूल्यों और शास्त्र आधारित आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सुव्यवस्थित मानकों से नियंत्रित मानवीय व्यवहार व्यक्ति और समाज दोनों को प्रकाशमान करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा—
“तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"
उन्होंने इस श्लोक का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसका निर्धारण करने में शास्त्रों को मार्गदर्शक माना जाना चाहिए। शास्त्रों में बताए गए नियमों और सिद्धांतों को समझकर ही मनुष्य को अपने कर्म करने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि धार्मिक और नैतिक आचरण दीपक के समान है, जो केवल व्यक्ति के जीवन को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को भी दिशा और प्रकाश प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्थापित मूल्यों और आदर्शों के अनुसार जीवन जीता है, तो उसका आचरण संतुलित और समाज के लिए उपयोगी बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज देशवासी संयम, दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहे हैं, जो भारतीय जीवन मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्रेष्ठ आचरण वही है जो व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करे और नागरिकों से नैतिक मूल्यों तथा कर्तव्यपरायणता को जीवन का आधार बनाने का आग्रह किया।











