भोपाल, 14 जून।
राजधानी के एम्स भोपाल में कैंसर से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पुलिस ने छह माह बाद दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले ने अस्पतालों में मरीज सुरक्षा और चिकित्सा प्रक्रियाओं के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार सागर जिले के बीना क्षेत्र निवासी सार्थक यादव को 15 दिसंबर 2025 को उपचार के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। वह रक्त कैंसर से पीड़ित था और उसका इलाज चल रहा था।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बायोप्सी प्रक्रिया के लिए लाई गई फॉर्मेलिन युक्त सिरिंज को सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय मरीज के बिस्तर के पास छोड़ दिया गया था। अगले दिन ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग अधिकारी द्वारा कथित रूप से उसी सिरिंज का उपयोग आईवी लाइन खोलने के लिए किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
परिजनों के अनुसार इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बाद में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मामले की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अस्पताल की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को भी शामिल किया गया।
पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एक नर्सिंग अधिकारी के विरुद्ध कथित लापरवाही तथा दूसरी के खिलाफ खतरनाक रासायनिक पदार्थ को असुरक्षित तरीके से रखने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है।
जांच रिपोर्ट में मौत का कारण फॉर्मेलिन इंजेक्शन बताया गया है। फॉर्मेलिन एक रासायनिक घोल होता है, जिसका उपयोग सामान्य रूप से जैविक नमूनों और अन्य सामग्री को संरक्षित रखने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका शरीर में प्रवेश गंभीर और घातक प्रभाव पैदा कर सकता है।
पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।















