कोलकाता, 22 जून।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय नौसेना को तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत सौंपे। इन प्लेटफॉर्म्स में आईएनएस दूनागिरी (स्टेल्थ फ्रिगेट), आईएनएस संशोधक (सर्वेक्षण पोत) और आईएनएस अग्रय (एंटी-सबमरीन वारफेयर शालो वाटर क्राफ्ट) शामिल हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक शक्ति सीधे तौर पर उसकी समुद्री क्षमता से निर्धारित होती है, जो सुरक्षा और समृद्धि का आधार है।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बदलती भूमिका पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र अब मात्र एक आयातक बनकर नहीं रह सकता। उन्होंने उल्लेख किया कि पूर्व के वर्षों में रक्षा आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण देश को रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2014 के बाद अपनाई गई नीतिगत सुधारों की दिशा ने इस परिदृश्य को बदलते हुए भारत को आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर किया है।
नौसेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले कुछ वर्षों में बेड़े में 40 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल की गई हैं। वर्तमान में 45 अन्य बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माण की प्रक्रिया में हैं, जो भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को एक नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री ने इन पोतों के जलावतरण को भारत की बढ़ती स्वदेशी निर्माण क्षमता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक बताया।









