बर्गेनस्टॉक, 22 जून।
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का दौर शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को सुदृढ़ बनाना है। अमेरिकी दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं। इस कूटनीतिक पहल में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर दोनों देशों के दावों में विरोधाभास देखने को मिला है। तेहरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों के विरोध में जलमार्ग बंद करने की बात कही थी, जिसे अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आवागमन निर्बाध रूप से जारी है। दोनों पक्षों के बीच पिछले सप्ताह हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन में लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
शांति वार्ता को एक 'ऐतिहासिक अवसर' बताते हुए उपराष्ट्रपति वेंस ने संबंधों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई है। हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर रोक न लगने की स्थिति में कठोर सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पुष्टि की है कि प्रस्तावित शांति समझौते के तहत कतर में फ्रीज की गई ईरान की 6 अरब डॉलर की राशि उसे वापस मिल जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब बर्गेनस्टॉक में चल रही इस वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं।









