जयपुर, 23 जून।
राजस्थान में प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े ओएमआर शीट फर्जीवाड़े में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ऐसे अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कथित रूप से अंक बढ़वाकर नौकरी हासिल करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि वास्तविक अंकों में हेरफेर कर दोनों को चयन सूची में शामिल कराया गया था।
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि परीक्षा की ओएमआर शीट स्कैनिंग से जुड़ी अधिकृत एजेंसी के कुछ कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों के साथ मिलीभगत कर बड़े स्तर पर गड़बड़ी की।
अनुसंधान में पाया गया कि एजेंसी से जुड़े कुछ कार्मिकों ने कई अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में कथित रूप से छेड़छाड़ कर उनके अंक बढ़ा दिए, जिससे उन्हें चयन सूची में स्थान मिल गया। इस मामले में पहले भी एजेंसी से जुड़े कई आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा संदेह के आधार पर मूल ओएमआर शीटों की दोबारा स्कैनिंग कराई गई। पुनः जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के अनुसार करौली जिले के निवासी महेन्द्र कुमार मीना के वास्तविक अंक चार थे, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें 165 अंक दर्शाया गया। इसी तरह दौसा जिले के देवेन्द्र सिंह गुर्जर के वास्तविक अंक दो पाए गए, जबकि स्कैनिंग रिकॉर्ड में 191 अंक दर्ज थे।
एसओजी ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अंक बढ़वाने के लिए किस स्तर पर सांठगांठ हुई और इसके बदले कितनी राशि का लेनदेन किया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस प्रकरण में कुल 27 अभ्यर्थियों के नाम संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें से अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनकी तलाश में विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई जारी है।
एसओजी का मानना है कि यह मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में संगठित तरीके से किए गए बड़े भर्ती घोटाले का हिस्सा हो सकता है। मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण खुलासों की संभावना जताई जा रही है।










