भोपाल, 23 जून।
मध्य प्रदेश में मानसून की अपेक्षित दस्तक में हो रही देरी ने राज्य की वर्षा प्रणाली को खासा प्रभावित किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में अब तक कुल 70.9 मिमी के औसत के मुकाबले मात्र 34.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 52 प्रतिशत कम है। राज्य के कुल 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की सामान्य तिथि 15 जून से आठ दिन बीत जाने के बाद भी यह पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका है, हालांकि अगले दो से तीन दिनों में मानसून के प्रदेश में प्रवेश की प्रबल संभावना जताई गई है।
क्षेत्रवार स्थिति का विश्लेषण करें तो प्रदेश के पूर्वी हिस्से (जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग) में सामान्य से 71 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल) में यह कमी 33 प्रतिशत रही है। उल्लेखनीय है कि भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर जैसे चुनिंदा जिलों में ही सामान्य से अधिक वर्षा हुई है, जबकि शेष अधिकांश जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हुई प्री-मानसूनी बारिश और आंधी ने थोड़ी राहत जरूर दी है। धार में 2 इंच और भोपाल में पौन इंच वर्षा के साथ ही अन्य जिलों में भी बारिश हुई। वहीं तापमान की बात करें तो दतिया 42.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग ने आज (मंगलवार) के लिए जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में लू (हीटवेव) का अलर्ट जारी किया है। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर से लेकर इंदौर तक के बड़े हिस्से में तेज आंधी के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है, जो मानसून के सक्रिय होने का संकेत माना जा रहा है।










