नई दिल्ली, 23 जून।
दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने मंगलवार को दक्षिण दिल्ली स्थित नवजीवन विहार का दौरा कर वहां विकसित ‘जीरो वेस्ट कॉलोनी’ मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने इस पहल को राजधानी में सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह मॉडल पूरे दिल्ली के लिए प्रेरणा बन सकता है और इसे अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने कॉलोनी में स्थापित आरआरआर सेंटर, विकेंद्रीकृत एरोबिक कंपोस्टिंग यूनिट, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण व्यवस्था और वर्षा जल संचयन प्रणाली का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि नागरिकों की सहभागिता और जिम्मेदारी के माध्यम से स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहरी वातावरण का निर्माण संभव है।
उपराज्यपाल ने एमसीडी को निर्देश दिए कि अन्य रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से अनधिकृत और निम्न आय वर्ग की कॉलोनियों में विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन एवं कंपोस्टिंग परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता के विकल्प तलाशने पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में एरोबिन और आरआरआर सेंटर जैसी आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए सीएसआर फंड का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन को मजबूत बनाया जा सकेगा।
टी.एस. संधू ने कहा कि टिकाऊ कचरा प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा घरों से शुरू होती है और प्रत्येक परिवार को कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करना चाहिए।
उन्होंने नवजीवन विहार आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासियों की सराहना करते हुए बताया कि यह मॉडल पिछले लगभग आठ वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस अवधि में कॉलोनी ने 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को लैंडफिल स्थलों तक पहुंचने से रोकने में सफलता हासिल की है।
उपराज्यपाल ने कहा कि ऐसे प्रयासों को संस्थागत सहयोग और व्यापक प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने सभी हितधारकों से संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और विश्वस्तरीय दिल्ली के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।










