नई दिल्ली, 23 जून।
संभावित अल नीनो प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और विशेषज्ञ संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति का आकलन किया।
बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य गति से पीछे चल रहा है और अब तक वर्षा में करीब 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के अनुसार आगामी दिनों में भी कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा किए गए विश्लेषण में देश के 315 जिलों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता, 76 जिलों को मध्यम प्राथमिकता और 128 जिलों को निम्न प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया गया है। ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित 12 राज्यों में स्थित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सभी प्रभावित जिलों के लिए जिला कृषि आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। इन योजनाओं में कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलों का चयन, फसल परिवर्तन की रणनीति, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों की आय सुरक्षित रखने के उपाय शामिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों से तालाब, जलाशय, नाले, खेत-तालाब, चेक डैम और अन्य जल संरचनाओं को मजबूत करने के लिए कहा गया है। साथ ही मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से जल संचयन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और कृषि मौसम सलाह इकाइयों को किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए एसएमएस, व्हाट्सऐप, कॉल सेंटर, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो चारा संकट भी पैदा हो सकता है। इसे देखते हुए पर्याप्त उपलब्धता वाले क्षेत्रों से कमी वाले इलाकों तक चारे की आपूर्ति की अग्रिम योजना बनाई जा रही है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने और अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की नहीं, बल्कि तैयारी और सामूहिक प्रयासों के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।










