नई दिल्ली, 23 जून।
उच्चतम न्यायालय ने 1993 के चर्चित बोवबाजार बम विस्फोट मामले में एक बड़ा निर्णय सुनाते हुए दोषी मोहम्मद रशीद खान की रिहाई पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत की वेकेशन बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दायर एक विशेष याचिका पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति पीके मिश्रा की पीठ ने इस मामले में दोषी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
ज्ञात हो कि बीते 5 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रशीद खान को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में तर्क दिया था कि दोषी पिछले 33 वर्षों से अधिक समय से सलाखों के पीछे है और उसके अच्छे आचरण को देखते हुए पुनर्वास के आधार पर उसे रिहा किया जाना न्यायसंगत है। अदालत ने माना था कि इतने लंबे समय की सजा के बाद दंड का मुख्य उद्देश्य पूरा हो चुका है।
इस फैसले के विरुद्ध पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए दलील दी गई कि रशीद खान इस भीषण विस्फोट का मास्टरमाइंड था। सरकार ने अपनी याचिका में जोर देकर कहा कि इस घटना का समाज पर अत्यधिक गंभीर और नकारात्मक प्रभाव पड़ा था, जिसके चलते उसे समय से पहले रिहाई देना अनुचित है। 1993 से लगातार जेल में बंद रशीद खान की रिहाई पर अब उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार है।










