संपादकीय
29 Jun, 2026

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एआई आधारित शिक्षा की नई पहल: 25 हजार शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण, 90 जिलों में फैलेगा डिजिटल शिक्षा अभियान

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एआई आधारित शिक्षा कार्यक्रम के तहत बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण व्यवस्था विकसित की जा रही है।

भोपाल, 29 जून।

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस योजना का नाम 'एआई आधारित शिक्षा' है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना है। विभाग के अनुसार, पहले चरण में 25 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 90 जिलों में एक साथ शुरू होगा, जिससे प्रदेश के हर क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।

पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक ने क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। परंपरागत चॉक और ब्लैकबोर्ड का स्थान अब स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट और इंटरएक्टिव लर्निंग ने ले लिया है। ऐसे समय में यदि सरकारी स्कूलों के शिक्षक तकनीक से दूर रहेंगे, तो छात्र निजी स्कूलों की तुलना में पीछे रह जाएंगे। इसी सोच के साथ एआई आधारित शिक्षा कार्यक्रम तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को बताया जाएगा कि कक्षा में एआई टूल्स का उपयोग कैसे करें, छात्रों की समझ के अनुसार पाठ को सरल और रोचक कैसे बनाएं तथा कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष शिक्षण योजना कैसे तैयार करें।

प्रशिक्षण का पहला चरण 25 जून को भोपाल में आयोजित किया गया। इसमें भोपाल के 90 शिक्षकों को एआई शोकेस स्कूल में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद अनूपपुर, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में भी प्रशिक्षण की शुरुआत हो चुकी है। योजना यह है कि प्रत्येक जिले से चयनित शिक्षक अपने साथी शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे, ताकि ज्ञान का विस्तार तेजी से हो सके। विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य तकनीकी कंपनियों को सहयोगी बनाया है, जो शिक्षकों को डिजिटल कंटेंट तैयार करने, प्रस्तुतीकरण बनाने और ऑनलाइन संसाधनों के उपयोग की जानकारी देंगे।

एआई आधारित शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब शिक्षक केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। वे एआई की मदद से प्रत्येक छात्र की सीखने की गति को समझ सकेंगे। यदि कोई छात्र गणित के किसी प्रश्न में बार-बार गलती कर रहा है, तो एआई सिस्टम शिक्षक को तुरंत संकेत देगा और वैकल्पिक तरीके से समझाने का सुझाव भी देगा। इसी प्रकार भाषा, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में भी एआई कहानी, चित्र और वीडियो के माध्यम से अवधारणाओं को स्पष्ट करेगा, जिससे छात्रों की रुचि बढ़ेगी और रटने की प्रवृत्ति घटेगी।

डिजिटल शिक्षा को लेकर लंबे समय से यह शिकायत रही है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में संसाधनों का अभाव है। इस नई पहल में विभाग ने इस समस्या के समाधान पर भी ध्यान दिया है। प्रत्येक जिले में एक एआई शोकेस स्कूल स्थापित किया जाएगा, जहां शिक्षक और छात्र मिलकर नई तकनीक का अभ्यास करेंगे। इन स्कूलों में टैबलेट, प्रोजेक्टर और इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा शिक्षकों को 36 घंटे का प्रमाणित व्यावसायिक विकास प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिसमें 21वीं सदी के कौशल, डिजिटल साक्षरता, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन कक्षा संचालन जैसे विषय शामिल होंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो सरकारी स्कूलों की छवि पूरी तरह बदल सकती है। अभी भी कई अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से हिचकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वहां पढ़ाई का स्तर कमजोर है। लेकिन जब शिक्षक एआई की मदद से विज्ञान और गणित को रोचक ढंग से पढ़ाएंगे तथा वीडियो और एनिमेशन के माध्यम से इतिहास और भूगोल जैसे विषयों को समझाएंगे, तो छात्र स्वाभाविक रूप से स्कूल की ओर आकर्षित होंगे और ड्रॉपआउट की दर भी घटेगी।

इस योजना की सफलता के लिए शिक्षकों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। कई शिक्षक पहले से ही डिजिटल उपकरणों के उपयोग में दक्ष हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी शिक्षक हैं, जिन्हें कंप्यूटर चलाने में कठिनाई होती है। उनके लिए विभाग ने सरल भाषा में प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए हैं। साथ ही हेल्पलाइन और मास्टर ट्रेनर की व्यवस्था भी की गई है, ताकि कोई भी शिक्षक बीच में अटकने पर तुरंत सहायता प्राप्त कर सके। विभाग का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों के भीतर प्रदेश के सभी सरकारी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में एआई आधारित शिक्षण को सामान्य बनाया जाए।

चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की उपलब्धता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई स्कूल ऐसे हैं, जहां नेटवर्क कमजोर है या बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं रहती। इन समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग ने सौर ऊर्जा आधारित बैकअप और ऑफलाइन कंटेंट की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। दूसरा प्रश्न लागत का है। 25 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित करना और 90 जिलों में तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार करना एक बड़ा निवेश है, लेकिन शिक्षा में किया गया निवेश भविष्य में कई गुना लाभ देता है। इसलिए इसे खर्च नहीं, बल्कि निवेश माना जाना चाहिए।

समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब अभिभावक यह समझेंगे कि एआई का अर्थ बच्चों को मशीन बनाना नहीं, बल्कि उन्हें रचनात्मक और तार्किक रूप से सोचने योग्य बनाना है, तो वे इस बदलाव का समर्थन करेंगे। गांवों की पंचायतें, स्कूल प्रबंधन समितियां और स्वयंसेवी संगठन यदि इस अभियान को अपनाएंगे, तो तकनीक स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाएगी।

मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। एआई आधारित शिक्षा केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकारोक्ति है कि आने वाला समय ज्ञान और कौशल का होगा और जो बच्चे आज स्कूल में हैं, वही कल देश की प्रगति का आधार बनेंगे। 25 हजार शिक्षकों का प्रशिक्षण और 90 जिलों में इसका विस्तार एक बड़ा कदम है। यदि इसे निरंतरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया गया, तो सरकारी स्कूल न केवल प्रतिस्पर्धा में टिकेंगे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक भी स्थापित करेंगे। क्योंकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो सोच सकें, समझ सकें और देश को आगे ले जा सकें।

|
आज का राशिफल

कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सवेरे निपटा लें। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। शुभांक-3-6-8

आज का मौसम

भोपाल

26° / 33°

Heavy thunderstorm

ट्रेंडिंग न्यूज़