कोलकाता, 29 जून।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुप्रतीक्षित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को पेश किए जाने की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने जल्दबाजी करने के बजाय इस संवेदनशील विषय पर पहले एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। विधानसभा के बजट सत्र का पहला चरण आज समाप्त हो रहा है, और अब इस विधेयक के भविष्य पर अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा।
कानून विभाग, जिसका प्रभार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास है, इस प्रस्तावित विधेयक के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की गहन समीक्षा करेगा। माना जा रहा है कि सरकार किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए एक ठोस कानूनी आधार तैयार करना चाहती है। मुख्यमंत्री आज विधानसभा में इस महत्वपूर्ण विषय पर अपना पक्ष रख सकते हैं, जिससे समिति के गठन और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में पश्चिम बंगाल का यह कदम उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के अनुरूप है। अन्य राज्यों में भी विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया था। अब इसी तर्ज पर बंगाल सरकार भी विस्तृत विमर्श के बाद ही आगे बढ़ने की रणनीति अपना रही है। दूसरे चरण का बजट सत्र 7 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें इस विधेयक पर आगे की चर्चा की जा सकती है।














