उरई, 07 जुलाई।
कुठौंद थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक अत्यंत हृदयविदारक घटना का खुलासा करते हुए अदालत ने एक पिता को अपनी ही आठ वर्षीय पुत्री की हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। करीब सात वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव सिंह ने आरोपी लाखन सिंह को दोषी पाया और उसे उम्रकैद के साथ ही 17 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है।
घटना का आरंभ 9 जून 2019 को हुआ था, जब लाखन सिंह ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी मासूम बेटी 8 जून की शाम से लापता है। अगले दिन बालिका का शव गांव में ही स्थित मातादीन के खेत में झाड़ियों के बीच पाया गया था। उस समय पिता ने अपनी पुरानी रंजिश का लाभ उठाते हुए गांव के दो निर्दोष व्यक्तियों, मोतीलाल और जाहर सिंह पर गला घोंटकर हत्या करने का आरोप मढ़ दिया था, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
मामले की जांच के दौरान सच्चाई तब सामने आई जब गांव के आल्हा सिंह ने पुलिस को जानकारी दी कि घटना के दिन उसने लाखन सिंह को अपनी बेटी के साथ मारपीट करते हुए देखा था। पुलिस ने इस गवाही के आधार पर लाखन सिंह से कड़ाई से पूछताछ की, जिसमें उसने अपना गुनाह कुबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने गुस्से में आकर अपनी ही बच्ची को मौत के घाट उतार दिया था और फिर पुलिस को गुमराह करने के लिए दो लोगों के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस ने 29 अगस्त 2019 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाकर न्यायालय ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया। दोषी पिता को मिली इस सजा के साथ ही वर्षों पुराने इस चर्चित हत्याकांड का कानूनी पटाक्षेप हो गया है।














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