नई दिल्ली, 07 जुलाई।
भारत की जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय को देश का 21वां नामित रिपॉजिटरी घोषित किया है।
यह संस्थान अब जैव विविधता अधिनियम के तहत जैविक नमूनों का आधिकारिक भंडारगृह होगा। यहाँ प्टेरिडोफाइट्स, मैक्रोफंगी, सरीसृप, मछलियों और तितलियों जैसी दुर्लभ प्रजातियों के वैज्ञानिक नमूनों को सुरक्षित रखा जाएगा।
वर्ष 2022 में बना यह संग्रहालय इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में स्थित है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध जैविक क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहाँ 7,500 से अधिक पौधे और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियां पाई जाती हैं।
नई प्रजातियों की खोज और वैज्ञानिक अनुसंधान में इस केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह संग्रहालय अब नई खोजी गई प्रजातियों के 'टाइप स्पेसिमेन' का भी आधिकारिक संरक्षण करेगा, जो भविष्य में पारिस्थितिक पुनर्स्थापन में सहायक होगा।
मंत्रालय का मानना है कि इससे नमूनों के दस्तावेजीकरण में आसानी होगी। इस मान्यता के बाद अब मिजोरम के स्थानीय जीवों और पौधों का संरक्षण उनके मूल परिवेश के करीब ही संभव हो पाएगा।











