जबलपुर, 07 जुलाई।
मध्यप्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाईकोर्ट में मंगलवार को इस महत्वपूर्ण विषय पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अनुपस्थिति का हवाला देते हुए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अब इस पूरे प्रकरण की अंतिम सुनवाई के लिए जल्द ही नई तारीख निर्धारित की जाएगी।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान सपाक्स संस्था के अधिवक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले के त्वरित निस्तारण की पुरजोर मांग उठाई। संस्था ने दलील दी कि जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक राज्य सरकार द्वारा की जा रही पदोन्नति की सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल अंतरिम रोक लगाई जानी चाहिए। संस्था ने हाल ही में विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी 15 पदोन्नति आदेशों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए स्पष्ट किया कि इसे अब अधिक लंबा नहीं खींचा जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से उस पूर्व मौखिक आश्वासन पर जवाब तलब किया है, जिसमें कहा गया था कि लंबित मामले के दौरान प्रदेश में कोई नई पदोन्नति नीति लागू नहीं की जाएगी। कोर्ट के इस सख्त रुख से प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।














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