नई दिल्ली, 07 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीवन में सफलता और धन-संपत्ति के महत्व को एक नई दृष्टि दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भौतिक समृद्धि का असली निखार व्यक्ति के स्वभाव में छिपी विनम्रता और दूसरों की सेवा करने के भाव से ही आता है।
पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक के माध्यम से सज्जन व्यक्ति के गुणों का वर्णन किया है। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार फलों से लदे हुए वृक्षों का झुकना उनकी उदारता दर्शाता है और जल से भरे बादल नीचे झुककर धरती को तृप्त करते हैं, वैसे ही महान लोग धन-दौलत मिलने पर भी सदैव जमीन से जुड़े रहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोककल्याण की भावना ही किसी भी सफलता की असली कसौटी होती है। जो लोग परोपकार को अपना स्वभाव बना लेते हैं, वे समृद्धि के शिखर पर पहुंचकर भी अहंकार से कोसों दूर रहते हैं।
जीवन में सदैव विनम्र बने रहना और दूसरों का भला करना ही सच्चे व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यही गुण समाज में व्यक्ति को एक अलग सम्मान और गरिमा प्रदान करते हैं।











